रात के क़रीब 9 बजें हमने खाना खाने के बाद विजय ने कहा कि वो उस किले पास जाना चाहता हैं।
"नहीं बेटा वहाँ मत जाना ।अगर तुमको या तुम्हारे दोस्तों को कुछ हुआ तो हम कुछ नहीं कर पाएंगे। हमने पहेले एक बेटा खोया हैं। अब कुछ और समस्या नहीं चाहते।"
"नहीं चाचा जी आप मुझपर यकीन रखिये हमको कुछ नहीं होगा।"
1 घंटे के बाद हम सब औऱ गाँव के कुछ युवकों के साथ उस किले की तरफ निकल पडे।
15-20 मिनटों के बाद हम उस किले की तल के निचे पहुंचे। अँधेरे में वो पर्बत किसी भयंकर दानव की तरह दिखाई देता था। राकेश इस उनकी पास वाली टॉर्च जलाई।
हम एक एक करके ऊपर चढ़ने लगें।कुछ ही ऊपर चढ़ने पर कुछ आवाज़ आने लगी हम वहीँ टॉर्च बन्द करके छुप गए।
कुछ अजीब सी आवाज़ों से सारे किले की जगह गूँज उठी। चिल्लाने की कुत्तो की भौंकने की आवाजें आने लगी। हम में से 3 लग भाग गए।
"चलो वापस चलते हैं।"मनोज ने कहा।
"नहीं! जरा रुको। "
"कुछ ख़तरा तो नहीं।"
" मुझे ये आवाज़ करने वाले भूत देखने हैं।"विजय ने कहा।
"लेकिन कुछ हुआ तो।" मनोज डर के मारे बोल रहा था।
"पहले तो ये भूत होते नहीं। अगर हैं तो ये आवाज़ क्यों करते हैं। "ये भूत नहीं आदमी ही है। जो आवाज़ निकाल रहे हैं। जरा गौर से सुनो ये आवाजें किसी बड़े साउंड पर लगाई गई हैं।"
आवाजें आना अचानक बन्द हो गयीं। हम कुछ देर वहीँ बैठें रहे । 10 मिनट के बाद हम आगए बढ़ने लगे। तभी नीचे किसी की चिल्लाने की आवाज आई। हम वही रुक गए।
आवाजों की दिशा से कोई तेजी से दौड़ के हमारी औऱ आ रहा था। तभी विजय ने उसकी कोट से बंदूक निकाल कर वहाँ तानी। अचानक एक लड़का बहुत डरा हुआ आके हमारी आगे गिरा।
"वहाँ!वहाँ! भूत हैं। ऊपर आकाश में घूम रहा है। उसने हम पर हमला किया।"
"क्या बोल रहे हों।ओर दोंनो कहा है?" राकेश ने उस लड़के को पूछा।
"वहाँ नीचे उनपर हमला हुआ है।" लड़के ने जवाब दिया।
हम सब तेज़ी से नीचे गए। तो सच में वहाँ 2 लड़के गिरे हुए थे। उनके सर पर मार लगी थी।
विजय ने उनकों चेक किया ।
"ये जिन्दा हैं। बेहोश हुये हैं।"
"अब क्या करें?" मैंने पूछा।
इनको गाँव लेके जाते है। हमनें उनको अपनी कंधों पे उठाकर गॉंव के डॉक्टर के पास लेके गए। डॉक्टर ने कहा कल सुबह तक इनको होश आ जायेगा।
"अब हम घर जाते है।कल उनसे पूछताछ करेंगे।" विजय ने कहा।
घर आने पर हम एक रूम में बैठ गए।
"तो तुम्हारे पास बंदूक भी हैं!"मैने विजय से पूछा।
"हाँ! मुझे मेरे सर ने दी हैं ईनाम के रूप मे।"
"क्यों?"
"एक बड़ी केस में मैं उनके साथ था। तभी हम पर हमला हुआ था। तब मैं बाल बाल बचा। तो उन्होंने मुझे मेरी सुरक्षा के लिए ये दी । दरों मत पूरी तरह से कानूनी हैं। मेरे पास इसकी लाइसंस हैं।"
क़ुछ देर बातचीत होने पर हम सोने लगे।
कुछ समय बाद मुझे एहसास हुआ कि हमारे कमरे में कोई हैं। मैं बहुत डर गया। गुनगुनाने की आवाज आने लगी। विजय किसीसे बातें कर रहा था।
"किससे बात कर रहे हों?"
"अरे तुम सोये नही!" विजय ने जवाब दिया "कुछ नहीँ बस ऐसे ही सोच रहा था।"
"क्या?"
"तूने उस लड़कों के सर की चोंट देखी !"
"नहीं! क्योंकि क्या हुआ?"
"वो चोट किसी बड़े से लोहे डण्डेकी थी। और बेहद दूर से मारी हैं।"
"तुम्हें कैसे पता चला?"
"क्योंकि चोट स खून निकल रहा था। अगर डंडा पास से मारा जाता तो शायद वो लड़के मर जाते। "
"लेकिन उस लड़के कहाँ की उसने भूत को बहुत पास से देखा है।
औऱ वो भूत ऊपर घूम रहा था।"
हाँ यही तो यानी वहाँ पे कुछ ओर भी लोग थे वहाँ।"
"लेकिन कौन?"
"वहीँ तो पता लगाना हैं।"

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