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जासूस विजय की कहानियाँ... भुतिया किला part 1
भूतिया
किला
शाम के 5:00
बजे मैं जब मैं अपने कमरे के पास आया तो मुझे बहुत सुकून मिला सुबह से हुई जर्नी से मैं बहुत थका हुआ था ।
हॉस्टल में मैं सबसे लास्ट में आने वाला लड़का था इसलिए मुझे अंत वाला कमरा मिला
था मैंने पहले ही सुना था कि मेरा रूम पार्टनर है लेकिन मैंने उसे कभी देखा नहीं
था जैसे मैंने दरवाजा खुला तो वह मेरे सामने अपने बिस्तर पर बैठा था जैसे ही मैं
अंदर गया उसने मुझे देखा और देखता ही रहेगा कुछ देर बाद देखने के बाद उसने मुझे
कहा कैसे हो राघव? सफर कैसा रहा? उसके इस सवाल से मैं उसको देखता ही रह
गया मैंने सोचा कि मैं इसे पहले तो कभी मिला ही नहीं या फिर हमारी मुलाकात भी नहीं
तो फिर इसको मेरा नाम कैसे पता? तभी
उसने मुझसे कहा क्या सोच रहे हो यही मैं तुम्हारा नाम कैसे जानता हूंमैंने
उससे कहा," हां! तुम्हें मेरा नाम कैसे पता? जबकि हम दोनों को भी मिले भी नहीं
तो वह
हंसते हुए खड़ा हो गया और कहां," मुझे
पता है तुम्हारा नाम क्या है? और
यह भी पता है कि तुम कहां से आए हो? तुम
अकेले नहीं आए हो तुम्हारे साथ और कोई भी था.
अब
मुझे आश्चर्य का जोर का धक्का का बैठ गया- इसको मेरे बारे में इतना कैसे मालूम?
उसने
कहा, " अरे, डरो नहीं मुझे तुम्हारे बारे में यह सब इसलिए पता है क्योंकि हॉस्टल
की मास्टर में मैं नहीं हमारे सब रूममेट्स की लिस्ट पड़ी है उसमें सब लड़के आ गए
थे लेकिन उसमें सिर्फ एक ही नाम खाली था जो कि तुम्हारा हो सकता है "
मैंने
उससे पूछा," और तुम्हें कैसे पता चला कि मैं अकेला
नहीं आया हूं?"
उसने
कहा," जब तुम अंदर आए तब तुमने अपने पॉकेट
में से दो बस की टिकटें डस्टबिन में फेंक दी इससे मैंने अंदाजा लगाया की, तुम गांव से अकेले नहीं आए थे, और तुम्हारा नाम तो मैंने पहले ही
मास्टर में पड़ा था, इसलिए मैंने तुम्हें तुम्हारे नाम से
बुलाया' मैं उसकी इस चालाकी को देखकर आश्चर्य
में रह गया
तभी
मैं जाकर फ्रेश होकर आया तब मैंने देखा कि हाथ में कुछ लिखकर बहुत ही गंभीरता से
पढ रहा था
मैंने
उससे पूछा," तुम्हारा नाम क्या है?"
उसने
कहा," डिटेक्टिव विजय"
मैं
सोच में पड़ गया की डिटेक्टिव?
तो
हंस के बोला," क्यों क्या हुआ? हां
मैं एक डिटेक्टिव हूं!"
मुझे
तो पहले लगा क्यों मजाक कर रहा है इसलिए, मैंने
इग्नोर कर दिया
मैंने अपना सारा सामान अच्छी तरह से अलमारी
में लगा दिया तभी औरत के 8 बजने को आए थे
उसने
मुझे कहा," राघव, खाने का क्या बंदोबस्त किया है,"
मैंने
कहा," अभी कुछ नहीं लेकिन कल से मेस लगाना
पड़ेगा"
" तो फिर चलो, मैं तुम्हें एक अच्छी मिस दिखाता हूं
यहां पास में ही है 10 मिनट की दूरी पर"
" ठीक है चलो!"
फिर
हम दोनों मेष की तरह बढ़ने लगे उसने मुझे कहा, लगता
है तुम्हें मेरी बात पर विश्वास नहीं आया कि मैं एक डिटेक्टिव हूं"
मैं
कुछ नहीं बोल पाया
उसने
आगे कहा," मुझे जासूसी करने में और किसी की पहेली
हल करने में आनंद आता है इसलिए मैं यह की पुलिस और अन्य लोगों की मदद करता
हूं"
मैं
उसकी बातें सुन रहा था आगे वह बोला," मैं अनाथ हूं,
मेरी परवरिश एक पुलिस इंस्पेक्टर ने की
है जब मैं उनसे मिला तो बहुत छोटा था इसलिए उन्होंने मुझे उनके पास ही रखा मैं
उनके काम करने के तरीके से बहुत ही प्रभावित था मैं उनको कुछ छोटी-मोटी केसेस मैं
मदद करता था तब से ही मुझे इस क्षेत्र की आकर्षकता. इसलिए मैंने सोचा कि मैं ऐसे
ही क्षेत्र में अपना कैरियर बनाऊंगा"
मैं उसकी बात सुनते जा रहा था वह अपने बारे
में सब कुछ बता रहा था पता नहीं क्यों हम पहले तो कभी नहीं मिले थे लेकिन फिर भी
मुझे उसके बारे में जानने की इच्छा उत्पन्न हो रही थी वह आगे बोला, जब उसने कॉलेज ज्वाइन किया तो उसका यही
पैशन और बढ़ गया और वह छोटे से केसेस मैं पुलिस की मदद करने लगा'
तभी हमारा मेस आ गया. हम दोनों ने वहां से
डिब्बा लेके वापस चलने लगे तो आगे बोला," क्या तुम्हें ऐसी चीजों में इंटरेस्ट है?"
मैं कुछ नहीं बोला
" मुझे पता है कि तुम बहुत होशियार हो
तुम अपनी कॉलेज में टॉप आए थे और मुझे पता है कि तुम यहां से पढ़ाई करने के लिए आए
हो तुम्हें ऐसी चीजों में कोई इंटरेस्ट नहीं होगा " नहीं ऐसी कोई बात नहीं है दरअसल मैं
इससे पहले किसी डिटेक्टिव को नहीं मिला हूं इसलिए यह सब थोड़ा अजीब लग रहा है और
कुछ नहीं"
" हां हां मुझे पता है लेकिन मुझे लगता
है कि हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन सकते हैं मुझे तुम्हारे जैसे होशियार दोस्त की
बहुत जरूरत है जो मुझे मेरी काम में मदद करें और मेरा अच्छा पाटनर बने"
हमारा गया था हमने खाया खाना खाया और सो गए
मुझे नींद पता ही नहीं चला क्योंकि मैं बहुत थक गया थासुबह
के 6:00 बज रहे थे मेरी आंख खुली तो मैंने
देखा कि विजय कुछ तो पढ़ रहा था मैंने कहा," क्या पढ़ रहे हो?"
"अरे मेरे दोस्त का एक दोस्त है, उसका मुझे एक लेटर आया है उसने मुझे
मदद मांगी है"
" कैसी मदद?"
" एक गांव का लड़का है उसका गांव पहाड़ी
इलाकों में आता है उसने इस पत्र में लिखा है कि कुछ दिनों से उसके गांव में से
छोटे बच्चे गायब हो रहे हैं 2
दिन पहले उसका छोटा भाई जो 10
साल का था वह दोपहर को खेलते खेलते ही अचानक से गायब हो गया है"
" तो फिर उसको पुलिस के पास जाना चाहिए
ना!"
" हां उसने कहा है कि, उसने पुलिस थाने में रिपोर्ट लिखवाई है, लेकिन उसे कुछ दाल में काला नजर आ रहा
है"
" कैसा?"
" उसने इस पत्र ने कहा है कि, उसके गांव के पास एक बहुत बड़ा पहाड़
है उस पहाड़ के ऊपर एक बहुत पुराना किला है किले को सभी लोग भूतिया किला कहते हैं
जब अमावस की रात होती है तो वहां से कुछ अजीबोगरीब आवाज आती है जब उसका भाई लापता
हुआ तब ढूंढते ढूंढते वह इस किले के पास पहुंच गया था तब उसको वहां पर कुछ
अजीबोगरीब दिखाई दिया"
" क्या दिखाइ दिया?"
" वह लिखता है कि जब वह वहां पहुंचा तो
तब उसको वहां पर कुछ पैरों के निशान और कुछ खुदाई करने वाले मशीनों के निशान दिखाई
दिए अंधेरा बहुत होने के कारण वह वहां पर नहीं जा पाया अगले सुबह जब वह वहां जाना
चाहता था तब उसके पिताजी ने उसे रोक दिया और कहा वहां जाना खतरे से खाली नहीं होगा
बहुत दिनों से वह कोई गया नहीं पता नहीं वह क्या है लेकिन उसकी मन की आशंका उसे वह
जाने को मजबूर कर रही थी इसलिए वह अपने कुछ साथियों के साथ वह चला गया जब उसने
देखा कि वहां कुछ भी नहीं है पैरों के निशान मशीनों के निशान सब गायब हो गया था तब
उसके दोस्तों ने उसे कहा कि तुमने कुछ नहीं देखा होगा तुम्हें सिर्फ भ्रम हुआ
होगा"
" हो सकता है कि उसको बुरा हुआ हो"
मैंने कहा
" हां! शायद हो सकता है लेकिन अगले दिन
वह अकेला वहां पर गया तब सुबह के 7:00 बज
रहे हैं थे उसने फिर से वहां कुछ पैरों के निशान और मशीनों के निशान देखे जब उसे
यकीन हो गया की यहां कुछ तो गड़बड़ है तभी उसे यह याद आया कि उसका एक दोस्त है
जिसका दोस्त यानी मैं उसकी कुछ मदद कर सकता हूं इसलिए मुझे उसने पत्र लिख के वहां
बुलाया है"
" तो तुम जाने वाले हो! कहां का गांव है?"
" यही हमारे पुणे जिले का गांव है जो
उत्तरी दिशा में पहाड़ों में है"
मैंने कहा." ठीक है" और मैं अपना काम
करने लगा. मुझे लगा कि वह मेरी तरफ देख रहा है तब मैंने कहा," क्या हुआ"
" मैं चाहता हूं कि तुम भी मेरे साथ
चलो"
" मैं कैसे आ सकता हूं मुझे तो कुछ पता
भी नहीं और मैं क्या मदद कर सकता हूं?"
" मेरे साथ चलो शायद तुम्हारी मदद हो जाए
और यहां रह कर क्या करोगे कॉलेज शुरू होने के लिए अभी दो-चार दिन बाकी है"
" लेकिन...."
" चलो तुम्हें मेरा काम दिखाता हूं और
तुम्हें कुछ अच्छा तो लगेगा वहां का नजारा बहुत सुंदर है"
मैं
सोचता रहा की अभी कॉलेज शुरू होने के लिए 4
दिन बाकी है बहुत बोर हो जाऊंगा
" ठीक है चलो! शायद कुछ तुम्हारे काम
आऊ" (आगे शुरू...)

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