हमनें जरूरी सामान ले लिया। हम हमारे कमरे से ऑटो से स्टेशन पहुंचे। हमने ट्रेन पकड़ी। ट्रैन शुरू होते ही मैने विजय से पूछा कि तुमने आज तक कितने केसेस हल किये हैं।
"कुछ याद नही लेकिन 20-25 होगयीं होंगें।",उसने कहा।
"यानि तुम्हें अच्छा तजुर्बा हैं इस काम का।" मैने कहा।
सच कहूँ तो मुझें ऐसे काम करने में मज़ा आता है। और अगर क़ोई काम ना हों तो बहुत ख़ाली ख़ाली लगता हैं। मेरे दिमाग़ हमेशां कोई काम चाहिये वरना मेरे लिए बहुत मुश्किल होता हैं।"
"लेकिन कॉलेज के दिनों में कैसे एडजेस्ट करते हों।"
" कॉलेज तो सिर्फ मेरे लिए कमरा मिलने का बहाना है। अगर मेरा खुद का घर होता तो मैं कभी कॉलेज ही नहीं जाता।"
लेकिन मुझे पढाई बहुत पसंद हैं। मैं कॉलेज नहीं बन्द कर सकता।"
वैसे मुझे भी बहुत पसंद हैं लेकिन मेरे दिमाग को अगर कोई काम मिला तो मुझे औऱ क़ुछ सुजता नही।"
हमें उस गाँव मे जाने को 2 घंटे लगें।जैसेही हम वहाँ उतरे विजय का दोस्त मनोज वहाँ खड़ा था। उसने हमें पुकार के बुलाया। उसके साथ एक लड़का था।
"कैसे हो विजय?",मनोज ने कहा।
"मैं ठीक हूँ!", विजय ने जवाब दिया।
"यह राकेश हैं।इसका ही तुम्हें खत आया था । तुमनें पढ़ा ना?"
"अरे पढ़ा इसलिए तो यहां हूँ।"
"अच्छा इससे मिलो ये राघव है। मेरा नया रूममेट । ",विजय ने मेरी पहचान करवाई।
सब हालचाल होने के बाद विजय ने कहा चलो अब हम तुम्हारे गांव चलते है।
राकेश सबसे आगे था। तभी विजय ने पूछा कि ,"राकेश मुझे ये बताओ कि तू कैसे शक हुआ कि तुम्हारा छोटा भाई गुम हो गया है। "
"जब माँ उसे आवाजें लगा रही थी खाना खाने के लिए तभी दूसरे बच्चों ने कहा कि सूरज बहुत देर पहले ही घर की ओर निकला था। जब सबने उसे ढूंढने की कोशिश की तभी सबको यकीन हो गया कि वह भी दूसरे बच्चों जैसा खो गया है। "
"लेकिन तुमको ऐसा क्यों लगा कि वो शायद उस पुराने किले की तरफ़ ही गया होगा।" विजय पूछताछ के लिबास में सवाल पूछा।
"जब गाँव से लड़के ग़ायब होने लगे तब से वह मुझे हमेशा पूछता की भैया लडक़े कौन ग़ायब करता है? औऱ वह हमेशा उस पुराने क़िले के बारे में पूछता रहता।"
"क्या है इस पुराने किले की कहानी?"
"कहाँ जाता हैं कि अंग्रेजों के काल में कुछ चोरो ने उस क़िले पर चोरी का सामान छुपा कर रखा था। उसमें हिरे मोती औऱ कुछ गहनें भी थे। करीब 15 -20 चोरों की टोली ने अंग्रेज सरकार को बहुत परेशान कर दिया था। तब पुणे के उस समय के कलेक्टर डिग्बी ने उन चोरों का बंदोबस्त करने के लिए एक टीम बनवाई। उस चोरों का पीछा करते करते वह इस किले पर पहुँच गए। लेकिन किला भारी मजबूत था। बहुत प्रयास करने पर भी चोर पुलिस के हाँत नहीं आ रहे थे। "
" एक दिन पुलिस ने तोफों की मदद से उस किले पर हमला किया । कहा जाता हैं कि उस में उन में से कुछ चोरों की औऱ उनके पत्नी और छोटे बच्चों की मौत हो गई। जो खजाना उन्होंने चुराया था। उसका कुछ पता नहीं चला। मेरे दादाजी कहा करते थे कि उस किले को उन चोर और उनके परिवार का शाप मिला है। जो भी उस खजाना को खोजने की कोशिश करेगा। वह हमेशा गायब हो जाता हैं। कुछ सालों पहले कुछ युवाओं ने उस खजाने की खोज करने की कोशिश की लेकिन उनको न जाने क्या हुआ एक एक करके सब बीमारी से मर गए। उस किले से चीखने चिल्लाने की आवाज़ें आने लगी। तभी गाँव वालों ने एक साधु से इसका हल पूछा। तो उसने कहा कि उस खजाने मैं उन चोर औऱ उनके परिवार की आत्मा अटक गई है। अगर कोई उस किले पर जाएगा तो ऐसे ही आवाजे आती रहेगी। तो पंचायत ने उस किले के क्षेत्र की हमेशा के लिए बन्द कर दिया। तबसे आज तक वो आवाज बन्द थी। लेकिन कुछ दिनों पहले ही वो फिर से शुरू हो गयी। और बच्चे भी ग़ायब होने लगे।"
हम सब राकेश की बातें पूरी ध्यान से सुन रहे थे। कब गाँव आ गया पता भी नहीं चला।
सच मे गाव बहुत हि सुन्दर था। हर तरफ हरयाली और उंचे उंचे पहाड और पर्बत थे। मैने तो ऐसा नजारा पहेली बार देखा था ।गाव में प्रवेश करने से पहले हि राकेश ने हमें दूर उंचे पर्बत पे खडा वो किला दिखा दिया ।मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि इतने बड़े पर्बत पे किला बनवाया कैसा होगा। ऊँचाई होने के कारण किला ऊपर बादलों में छिपा हुआ नजर आता था।
हम सब राकेश के घर पहुंच गये थे। तब समय शाम का हो चुका था। मैं तो बहुत थक गया था। आराम की सख्त जरूरत थी।
"विजय औऱ राघव तुम कुछ समय आराम करो हम कल कुछ लोगों की मदद से उस क़िले की औऱ बढेंगे।",मनोज ने कहा।
"राघव तुम आराम करो मैं तब तक थोड़ा घूम के आता हूँ। " विजय ने मुझसे कहा। औऱ मुझे देखें बिना वहाँ से चला गया।
" अरे इतने थके होने के बाद भी यह लड़का आखिर इस अनजान गांव कहाँ जा रहा है।" राकेश की पिताजी ने सवाल किया।
"अरे चाचा ये वहीँ लड़का हैं जो आपकी मदद करने आया है। सामने इतना बड़ा केस होके वो कैसे शांत बैठ सकता हैं। कुछ तो जानकारी इखट्टा करने गया होगा। फिकर ना करें।"मनोज ने राकेश के पिताजी को समझया।
हम लोगों ने कुछ उपहार किया औऱ वहीं पर आराम करने लगे। शाम करीब 7 बजें विजय सारा गांव घूमकर आया। उसने थोड़ा पानी पीकर राकेश से बातें करने लगा।
"राकेश मुझे बताओ कि वो जो किला हैं वो कोसकी जायदात हैं। यानि उसका कोई मालिक या उस का कोई रखवाला हैं क्या। "
,"मेरी हिसाब से उस किले का कोई मालिक या कोई रखवाला नहीं। लेकिन पंचायत ने 4 ऐसे लोगों को वहाँ की पहरेदारी का काम दिया हैं जो वो वहां खड़े रहकर कोई गलती से उस पास न जाए इसके लिए।"
"क्या वो 4 भीमा, अजित,शंकर औऱ रहमान तो नहीं।"
"हाँ!हाँ!वोही चारों हैं।"राकेश ने जवाब दिया।
"लेकिन वो चारों तो किसी न किसी कारण जेल जा चुके हैं ना?"
"हाँ , लेकिन वहाँ वापस आने के बाद उनको उनकी गलती का एहसास हुआ। तो पंचायत ने ही उन्हें एक मौका दिया ओर उनको ये काम दिया गया। लेकिन तब से आज तक उनकी कोई तक्रार नहीं आईं पंचायत में।"

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