"उठिये राजकुमार ! सुबह आपको प्रशिक्षण जाना हैं | सुबह हे ५.०० बजे हैं | ", राजकुमार अर्जुन के मामाजी ने आवाज़ लगाई |
"क्या मामाजी आज तो हमें छुट्टी दीजिए | आज तो हमारा जन्म दिन हैं | राजकुमार अर्जुन उठते उठते बोल पढ़े |
" तभी तो राजकुमार आज दरबार में सब लोग इखट्टा होंगे आपको दुआ देने के लिए |"
"लेकिन मामाजी। ..."
"लेकिन वेकिन कुछ नहीं ! आप उठिये वरना राजासाहब गुस्सा होंगे |"
"उनको और क्या आता हैं ?"
"ऐसा न कहे वो राज्य के राजा हैं, और आपके पिताश्री | उनका आदेश सबको मानना चाहिए |"
अर्जुन और छोटे राजकुमार जयदेव सुबह की सारी विधियाँ करके प्रशिक्षण करके वापस महल मैं आ गए | राजकुमार अर्जुन की जन्मदिन की तैयारियाँ होने लगी थी | सारा महल फूलों से सजाया जा रहा था | सभी हाँथी घोड़े सजाया जा रहे थे | युराज के जन्मदिन पर दूर दूर की राज्यों के राजा अपनी पुत्रिओं के साथ जन्मदिन पर आने वाले थे |राजकुमार अर्जुन को उनमेसे एक को शादी पसंद करना था |
राजकुमार अर्जुन को ये शाही वातावरण का कोई आकर्षण नहीं था | उसे तो आम जनता में घूमना अपने मित्रों में बैठना उनके साथ घुमन ये सब पसंद था | रत को महल में बड़े स्नेहभोजन का आयोजन किया था | उसमे उसके मित्र भी शामिल थे | बड़े बड़े राजघराने की राजा महाराजा और उनके साथ उनकी सुन्दर बेटियाँ भी शामिल हो है थी | कार्यक्रम का आयोजन बढे ही शान से किया गया था | सब लोगों को खाना कपडे और आवश्यक सामग्री का आवंटन किया गया |
सुन्दर राजकुमारियां अर्जुन को भेट वस्तु देकर खुद का परिचय करके उसका दिल आकर्षित करने का प्रयास कर रही थीं | परन्तु राजकुमार अर्जुन को कोई भी राजकुमारी पसंद नहीं आई |
"जन्म दिन की हार्दिक शुब्कामनाए राजकुमार | "
राजकुमार ने उस कोमल आवाज की तरफ ध्यान दिया | वो उस युवती को देखता ही रह गया |
सुन्दर साज , आकर्षक मुस्कान, रेशम से बाल, बरसात की पहेली बून्द की तरह आँखों की चमक , गुलाब के फूलों की तरह उसके नाजुक होंठ | राजकुमार का मन उस लड़की ने पूरी तरह आकर्षित किया |
"कहा खो गए राजकुमार ? जन्म दिन की शुभकामनाए |"
उसकी बात से राजकुमार अर्जुन होश में आ गए |
हात में पुष्प गुच्छ लेकर उसका धन्यवाद किया. वो लड़की वहां से चली गयी. पुरे कायर्क्रम में राजकुमार सिर्फ उसको ही चुप चुप के दिखते थे | उसका बात करने का अंदाज , चाल उसका सबके प्रति प्रेम पूर्वक व्यवहार से राजकुमार का दिल उस पर आ गया | उसका मन उसके प्यार में पहली ही नजर में घायल हो गया |
राजकुमार की नजर मामाजी की समाज में आ गयी | " क्या हुआ राजकुमार क्या बात है ? आपका ? हैं किस राजकुमारी पर आपकी नजरें तिकी हैं ? कौन हैं वो खुश नसीब ?"
" मामाजी ऐसा कुछ भी नहीं | कुछ भी सोच लेते आप तो !"
"बेटा तुमको मुझसे ज्यादा कोण पहचान हैं ? जब तुम्हारी माँ गुजर गई तबसे तुम मेरे पास ही हो | बताओ कोन हैं वो | "
"मामाजी सही वक्त आने पर मैं आपको खुद बताऊँगा | किसीको कुछ न बोले | "
" ठीक हैं जैसी आपकी मर्जी राजकुमार |"
राजकुमार को उस लड़की बारे में जानने की इच्छा निर्माण हुई | उन्होंने राजकुमार जयदेव को बुलाया |
"राजकुमार जयदेव आप यहाँ आई सब राजकुमारी और लड़कियों जानते है न !"
"सब को नहीं परन्तु कुछ कुछ जानता हूँ | "
"वो जो लाल चुनार वाली लड़की कौन हैं ?"
"अपने उनको नहीं पहचाना ? वो तो आपकी बचपन की सहेली हैं | "
"मेरी सहेली? कौन हैं वो ?"
" हाँ ! अरे भैया आप तो उसके साथ ही बचपन खेला करते थे | ये हमारी प्रधानमंत्री की बेटी सरस्वती हैं| "
"सरस्वती ! "
राजकुमार तब याद आया की बचपन में ये सरस्वती से ही खेला करते थे | उसके साथ ही खाना खाना , घूमना सब काम किया करते थे | राजकुमार अर्जुन को तो यकीं ही नहीं हो रहा था की वो वही सरस्वती हैं जो उसकी बचपन की दोस्त थी |
"भैया जब आप लन्दन पढ़ने लिए गए थे तब ये भी अपने मौसी यहाँ कल ही तो आयी हैं गाँव से | आपका जन्मदिन उसको यद् था |इ लेकिन अपने तो उसे पहचाना ही नहीं ?"
राजकुमार अर्जुन ने उसे बात करने का सोचा | लेकिन वो उसके माँ के साथ फिर अपने घर गई |
आज पहली बार राजकुमार अर्जुन को रातभर नींद नहीं आयी | सरस्वती की यादों में वो करवटें बदल बदल कर सोने की कोशिश कर रहेथे | लेकिन सरस्वती ने तो उनकी नींद भी चुराई | बार बार उनको सरस्वती की याद आ रही थी | मासूम चेहरा उनकी आँखों को बंद ही नहीं होने दे रहें थे |
"राजकुमार उठिए ! " मामाजी ने आवाज लगाई |
"बहुत ही देर की आज आने में मामाजी ? " राजकुमार बात सुनकर मामाजी दंग रह गए |
राजकुमार आज तो मैं जल्दी ही आया हूँ | लगता हे किसीने आपकी रातों की नींदे भी चुराई हैं | बताइये कौन है वो | "
राजकुमार शर्मा कर बोले।" कोई नहीं मामाजी आपतो हमेशा मेरा मजाक उदात्त हैं |" राजकुमार प्रशिक्षण की तयारी के लिए चले गए|
मामाजी सब समाज गए लेकिन कुछ नहीं बोले | वो उस लड़की का नाम राजकुमार की मुँह सुनना चाहते थे |
सुबह का स्नेह भोजन करके राजकुमार सरस्वती के घर उसको मिलाने के लिए चले गए | रस्ते में वो सोच रहे थे की क्या बोले उससे | कल में उसे पहचान नहीं पाया | शायद उसे गुस्सा आया होगा |
"आइये राजकुमार ! आज यहाँ कहा करीब के घर ? "
थोड़ा से चौंक कर , " अरे नहीं ऐसे ही जा रहा था , सोचा आपको मिल लूँ !"
"राजकुमार शायद मुझे पहचाना नहीं | मैं सरस्वती |"
" अरे ऐसी बात नहीं पहचाना न ! "
" तो आप ऐसे क्यों परायों सी बात कर रहे हैं? मुझे नाम से बुलाइये |"
राजकुमार हाँ पडे | " कल तुमसे बातचीत नहीं हुई न इसलिए सोच की आज मिल के आता हूँ |"
"आइये ना इधर बैठे | "राजकुमार झूले पे बैठ गए |
"कैसी हो ? सब ठीक ना गांव से कब आयी |"
"मई ठीक हूँ | दो दिन पहले ही आयी | आप कैसे हैं ? लन्दन जाके बड ही बदल गए हैं |"
"अरे तुम कड़ी क्यों हो बैठो ना ! "
सरस्वती थोड़ी शर्माकर , " नहीं मैं ठीक हूँ | आप क्या लेंगे ?"
" कुछ नहीं बस तुमसे बातें करने आया था | "
"तो राजकुमारी पसंद आई की नहीं ?"
" हाँ!"
सरस्वती का चेहरा थोडासा उतर गया , " कौनसे राज्य की हैं वो खुश नसीब राजकुमारी ?"
राजकुमार की आँखों उसकी नाराजगी पकड़ ली |
" राजकुमारी नहीं लेकिन किसी राजकुमारी से काम नहीं |''
"मतलब ?"
" मुझे राजकुमारी नहीं बल्कि स्वर्ग से आई पारी जैसी लड़की पसंद आई |"
" कोनसे राज्य की हैं ?"
"हमारे ही राज्य की हैं | जिसका रूप साक्षात् देवी जैसा हैं | नाम भी | "
सरस्वती को समाज नहीं आया | जब समझी तब शर्मा गयी | कुछ बोल पाति तभी उसकी माँ ने उसे आवाज दी |
सरस्वती ने राजकुमार अर्जुन को घर आने की विनति की | राजकुमार को देख कर सरस्वती माँ भी खुश हुई |
" आईये राजकुमार आज यहाँ कहाँ रास्ता खो गए ? " जबसे लन्दन गए तबसे यहाँ आप ए ही नहीं? हमें लगा आप हमें भूल गए !"
" नहीं ऐसी बात नहीं | बहुत काम रहता हैं ना तो समय ही नहीं मिल पाता | लेकिन अब राज आया करूंगा | मिलाने की लिए |" सरस्वती की और देख कर राजकुमार बोले |
सरस्वती शर्मा गयी |
" हाँ ! जरूर आईयेगा अब सरस्वती आयी हैं | कल सिर्फ आपके बारे में ही बाटे कर रही हैं | राजकुमार अब बहुत ही बदल गए हैं | सिर्फ आपके ही गुणों की चर्चा कर रही हैं |"
"सच में सरस्वती ?"
" नहीं ऐसी बात नहीं !" सरस्वती शर्म के मारे पानी पानी हो गयी |
(आगे शुरू.......)

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