एक था राजकुमार PART 2


"अच्छा अब मैं चलता हूँ | "
"क्यों क्या हुआ अभी तो आये थे , और चल दिए ?"
" अभी रेसिडेंट साहब आने वाले हैं | उनसे मुलाकात करनी हैं | महाराज अभी बाहर गए हैं ना !"
"ठीक हैं ! जैसी आपकी मर्जी लेकिन यकीन दिन भोजन करने जरूर आना |"
"जी जरूर आऊँगा |"
माँ मैं इनको बाहर छोड़ कर आती हूँ |" 
हाँ ठीक हैं |  लेकिन जल्दी आना मुझे तुम्हारी मदद चाहिए रसोई में!"
सरस्वती और राजकुमार बाहर एते हैं | 
"आज शाम क्या कर रही हों?"
"क्यों ? कुछ काम था क्या ?"
"काम नहीं ! बस यूँ मिलाना चाहता था | तालाब के किनारे |"
"उधर क्यों ? इधर ही कही मिलते हैं ना !"
"तुम आओ या ना आओ मैं तुम्हारी रह देखूंगा |"
"आप इस राज्य के राजकुमार हैं | ऐसेही किसीको मिलना आपको शोभा नहीं देता !" 
"किसीको भी नहीं ! मैं अपनी बचपन की दोस्त को मिलने के लिए आऊंगा |" 
"ठीक हैं !"
   राजकुमार अर्जुन रेजिडेंट से मिलाने गए | लेकिन उनका सब ध्यान सरस्वती पर ही था | वो शाम होने का इंतजार कर रहे थे | शाम ६ बजने के समय वो अकेले ही तालाब किनारे पहुँच गए | उन्होंने देखा की सरस्वती वहाँ पहलेसे ही थी | 
"मेरे पहले ही आ गई ?" 
" राजकुमार  इंतजार करवाना यानि  उनका अपमान करने के बराबर हैं | इसलिए जल्दी आईं | "
"अच्छा !"
"बोलिये ! क्या  काम था ? जो मुझे इतनी दूर बुलवाया | " 
" सरु युम्हे पता हैं हम बचपन हमारा सारा समय यही इस तालाब किनारे बिताया करते थे | "
सरस्वती हंस पड़ी | 
"क्या हुआ हंसी क्यों ? "
"कुछ नहीं अपने मुझे सरु बुलाया इसलिए हंसी आई |"
"मैं तुम्हे बचपन में इसी नाम से बुलाया करता थे ना !"
" हाँ ! मुझे लगा आप भूल गए | लेकिन आपको तो सब याद हैं | " 
"उडालो मेरा मजाक |" 
" नहीं !नहीं! मजाक नहीं ! मुझे तो पसंद आया की आपको मेरा नाम पता हैं जो सिर्फ आप लेते हैं |"
"और क्या , क्या पसंद हैं ?"
सरस्वती शर्मा गयी | 
" और बताई , कैसा हे अंग्रेजो का देश ? सुना हैं वहां लड़कियाँ बहुत ही सुन्दर हैं!"
"मुझे कुछ पसंद नहीं आया | मुझे तो हमारा देश ही बेहद पसंद हे | मेरे राज्य की जनता | राजकुमार जयदेव ,मामाजी और। ...."
"और कौंन ?"
"और तुम ! " 
सरस्वती शर्म के मारे लाल हो गई | 
" आप मजाक बहुत करते हैं | मैं जाती हूँ |" सरस्वती उठने लगी तभी राजकुमार उसका हांत पकड़ा और कहा ' " क्या हुआ बुरा लगा ?"
यकीं मानो जब से तुमको देखा तब से में पागल हो गया हूँ | हर पल तुम्हारा ही चेहरा नजरों के सामने आता हैं | रात को नींद भी नहीं आई | क्या मैं तुम्हे पसंद नहीं ?"
"लेकिन राजकुमार आप तो राजा के बेटे हैं और मैंने एक साधारण मंत्री की बेटी | मैं आपके लायक नहीं हूँ | "
"क्यों ? क्यूंकि मैं एक राजा बीटा हूँ इसलिए | अगर यही बात हैं तो आज ही में ये सब छोड़ देने को तैयार हूँ |"
"नहीं नहीं राजकुमार ऐसा न कहें !महाराज को आपसे बहुत उम्मदें हैं | उन्होंने आपके लिए बहुत ही सुन्दर और बड़े राज्य की राजकुमारी पसंद की होगी | "
" इसका मतलब ये हैं की मैं तुमको पसंद नहीं आया !"
" ऐसी बात  हैं |  आप तो किसीको भी पसंद आ जायेंगे | सभी को आपका वर्तन पता हैं | "
" मुझे तो सिर्फ तुमसे मतलब हैं सरु | दूसरों की मुझे फिक्र नहीं | बहुत लड़कियां राजकुमारियाँ देखि, विदेश की भी देखि | कल के कार्यक्रम में भी मुझे कोई पसंद नहीं आई | लेकिन जब तुम्हारी आवाज सुनी में पागल हो गया | मैने ठानी हैं विवाह करूँगा तो सिर्फ तुम्हारे ही साथ | अब तुम्हारा जवाब दो | अगर नहीं हैं तो मैं तुम्हे कभी तंग नहीं करूँगा |" 
सरस्वती शरमाकर मुस्कुराई और हाँ कह दिया | 
"मुझे पता था तुम भी मुझे पसंद करोगी |"
" आप तो मुझे बचपन से पसंद थे |"
"क्यां ?"
"हाँ ! लेकिन आप इतने बुध्दू थे की कुछ समज नहीं पाते |"
हंसकर राजकुमार ने उसको बाँहों में भर लिया | 
" राजकुमार लेकिन महाराज इस विवाह को सम्मति देंगे ?"
" पता नहीं! लेकिन कुछ भी में शादी तो सिर्फ तुमसे ही करूँगा !"
"राजकुमार आप यहाँ हैं ? चलिए महाराज ने आपको बुलाया हैं | कुछ जरुरी बातचीत करनी हैं शायद |"
" क्या बातचीत मामाजी ? " 
" पता नहीं लेकिन आप चलिए तो सही |"
"सरु अब हमे जाना चाहिए |"
"ठीक हैं !"
सब वहाँ स चले गए | राजकुमार महाराज के कक्ष में गए | 
"महाराज आपने हमें याद किया !"
"हाँ ! राजकुमार अब आपकी विवाह की उम्र हो चुकी हैं | तो हमने आपके लिए एक लड़की को पसंद किया हैं आपके लिए | बेहद ही सुन्दर और सुशिल हैं | और तुम उसको जानते ही हो | तुम उसको मिले भी हमारे करीब की हैं | "
राजकुमार को भ्रम हुआ की महाराज सरस्वती की ही बात आकर रहें हैं | व मन ही मन में खुश हो गए | कुछ पूँछे बिना ही उन्होंने विवाह के लिए हाँ कहा | "शाब्बाश ! मुझे पता था की, तुम मुझे कभी नाराज नहीं करोगे | हम जल्दी ही ही सब परंपराओं के  अनुसार तुम्हारा विवाह  " 
 राजकुमार बहुत ही खुश हुए | उनको लगा की कब ये बात मई सरस्वती को बताऊँ? उन्होंने मन में विचार किया की कल उसे यह बात बता कर आश्चर्य का धक्का दे | 
राजकुमार बहुत ही ख़ुशी में रात में सो गए | 
सुबह मामाजी उन्हें उठाने ए तो वो बेहद खुश थे 
" मामाजी मैं आज बहुत हूँ आनंदित हूँ | मुझे इतना आनंद खभी नहीं मिला |"
"क्या हुआ राजकुमार कोनसी ख़ुशी की बात हैं | "
"मामाजी महाराज ने उसी लड़की को पसंद किया हैं हमारे लिया जो मुझे पसंद हैं |"
" कौन सरस्वती ?"
" आपको कैसे पता ?" 
" राजकुमार में आपका सगा नहीं फिर भी मां हूँ | मेरे भांजे को कोनसी लड़की पसंद हैं ये मुझे पता नहीं होगा ?"
"आपको कब पता चला ?" 
" आपके जन्मदिन के कार्यक्रम में !"
"क्या ? लेकिन आप कुछ बोले क्यों नहीं ?"
" आप थे कहा एक जगह ? आप तो कल से सरस्वती साथ ही थे | कब पूंछता आपको ?"
" मामाजी आपको कैसी लगी सरु ?"
"सच कहु राजकुमार , साक्षात् लक्ष्मी  हैं सरस्वती | अगर आज आपकी माँ होती तो वो भी सरस्वती को ही आपके लिए पसंत कर लेती | "
" हाँ मामाजी आज माँ होतीं तो कितनी ख़ुश हों जाती  वो !"

  राजकुमार ने एक नौकर के पास सरस्वती को तुरंत मिलाने का सन्देश भेजा | तालाब के किनारे जाकर वो उसका इंतजार करने लगे | सरस्वती एते देख वो बहुत खुश हुए | पास आने पर उसको अपनी बाँहों में भर लिया | 
"क्या हुआ राजकुमार आज इतने खुश क्यों हैं आप ?"
" तुम्हे एक ख़ुशी की बात बतानी हैं | "
" कौनसी ?"
"ज़रा अंदाजा लगाओ ?"
" अ. ..... नहीं पता ! बताइये ना ?"
" महाराज ने मेरे लिए एक लड़की पसंद की हैं।  बहुत ही सुन्दर हैं।  महाराज को भी अच्छी लगी।  "
" अच्छा कौनसी राजकुमार हैं। "
" आओ दिखता हूँ।  "
"कहाँ ?"
"आओ तो सही।   यही   हैं !"
राजकुमार ने उसे तालाब के पानी में देखने को कहाँ। 
" कहा हैं राजकुमार ?"
" वो देखो , मेरे साथ खड़ी हैं। "
सरस्वती को पहले समाज में नहीं आया।  जब समझ गयी तो शर्म से लाला हो गयी। "
" आप फिर मजाक कर रहें हैं ना !"
" नहीं सरु ! में सच कह रहा हूँ।  कल महाराज खुद कहाँ की उसने एक लड़की पसंद की हैं हमारे लिए।  सुन्दर हैं अच्छे घर की हैं, में उसको जनता हूँ और बचपन में उसको देखा  भी हैं।  अब मुझे बताओ ो तुम ही हो ना ! "
सरस्वती शर्मा गयी।  वो भी खुश हो हाई। 
"लेकिन पिताजी या माँ ने मुझे कुछ नहीं बताया ?"
" शायद वो तुमको अचानक बताने वाले हों !"
राजकुमार ने सरस्वती को उनकी बाँहों में ले लिया 
" क्या कर रहें हैं राजकुमार कोई देख लेगा !"
" तो क्या हुआ कुछ दिनों के बाद तुम मेरी पत्नी बनाने वाली हो।  "
सरस्वती भी राजकंवर के बाँहों में आराम से सिमित कर बैठ गयी। 
राजकुमार बहुत ही खुश थे।  उनका सपना सच होने वाला था।  उधर महाराज ने शादी की तैयारी का हुकुम दे दिया।  सारे राज्य में ख़ुशी का वातावरण था।  
" क्या बात हैं ! भ्राताश्री  ! आप तो बहुत ही खुश हैं।  आप का मन तो बहुत ही बड़ा हे जो लड़की को बना देखे ही है कर दिया।  "
" मतलब उसे तो बचपन से ही देखता आ रहाँ हूँ।  "
"लेकिन भैया , बचपन की बात अलग होती हैं ना।  इंसान बहुत बदल जाता हैं।  "
" नहीं।  बचपन में जितना सुन्दर थी  आज उतनी ही सुन्दर हैं सरु। "
"सरु ? ये सरु कौन ?"
" अच्छा तो तुम्हे सरु नहीं पता ! अरे सरस्वती पगले ।  "
राजकुमार जयदेव को कुछ समाज नहीं आया /
" लेकिन उसका यहाँ क्या काम। "
" मतलब ? जिसके साथ मेरा विवाह होने वाला हैं उसका यहाँ क्या काम ? लगता हैं सुबह से कोई नहीं मिला तुम्हे टांग खींचने को।  इसलिए मेरी खिंच रहा हैं। "
" लेकिन भैया आपका विवाह तो मधुमती से होने वाला हैं ना !"
" मधुमती ? कौन मधुमती ?"
" महाराज की बड़ी बहन हमारी बुआ की बेटी मधुमती। "
"क्या बोल रहे हों ? लेकिन महाराज ने तो सरस्वती को पसंद किया था ना मेरे लिए !"
" आपको किसने कहाँ ? महाराज जब वहाँ से विवाह का प्रस्ताव लेके ए थे तब आपको बताया था। "
राजकुमार को कुछ समाज नहीं आ रहा था।  उनका सर चकरा रहा था।  
"राजकुमार जयदेव देखो मजाक मत करना। "
"नहीं भैया में मजाक नहीं कर रहा।  महाराज ने आपको बताया था ना की उन्होंने एक लड़की को पसंद किया हैं जिसको तुम जानते हो , बचपन में देखा था।  "
" हाँ कहाँ तो था लेकिन मुझे लगा की वो सरस्वती के बारे में बोल राजें हैं। "
" सरस्वती का नाम महाराज ने तो लिया ही नहीं।  उस दिन वो अपनी बहन की गांव से ए थे और वहां उन्होंने मधुमती को देखा था।  उनको अच्छी  लगी तो आपसे बात की।  "
"लेकिन तुम मुझे क्यों नहीं बताया की वो सरस्वती नहीं मधुमती हैं। "
"मुझे क्या पता की आपके मन में मधुमती नहीं बल्कि सरस्वती हैं। "
राजकुमार अर्जुन को कुछ समाज नहीं आ रहा था। वो तुरंत मामाजी को मिलाने गए। 
" आइये राजकुमार क्या काम हैं अब आप ज्यादा भागदौड़ ना करें विवाह का शुभ दिन पास ही आ रहा हैं। 
" आप सबने ने मुझे बेवकूफ बनाया हैं।  सबने मुझे फँसाया हैं।  क्यों किया ऐसा ?"



                                                                                  ( आगे शुरू .......)





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